हिंदी विभाग भाषा कौशल के साथ साथ भाषा की सृजन शीलता के ज्ञान के साथ ही रचनात्मक साहित्य के एक ऐसे क्रम में सुनियोजित है जिससे पाठ्यक्रम में नीरस ज्ञान की ऊब से बचा जा सके और शिक्षार्थियो में बुद्धि और चेतना अनुभव तथा कल्पना का ऐसा रसायन साकार हो जाय जो उसके व्यक्तित्व की एकमुखता अतिवादिता और सीमा परकता में न्यूनतम करते हुए उसमे समरसता और सामंजस्य की खोज के योग्य बन सके |